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UPSSSC Pravidhik Sahayak Syllabus 2026 and New Exam Pattern in Hindi

UPSSSC Pravidhik Sahayak Syllabus 2026: आधिकारिक परीक्षा पाठ्यक्रम और नया पैटर्न (Hindi): उत्तर प्रदेश अधीनस्थ सेवा चयन आयोग (UPSSSC) ने विज्ञापन संख्या 06-परीक्षा/2026 के माध्यम से प्राविधिक सहायक (ग्रुप-सी) के 2759 पदों के लिए आधिकारिक पाठ्यक्रम जारी कर दिया है। यदि आप इस परीक्षा में सफल होना चाहते हैं, तो आपको UPSSSC प्राविधिक सहायक सिलेबस और सटीक टॉपिक-वार अंकों की / परीक्षा पैटर्न की जानकारी होना अनिवार्य है।

UPSSSC Pravidhik Sahayak Exam Pattern 2026

महत्वपूर्ण बिंदु:

  • प्रश्नों का प्रकार: वस्तुनिष्ठ एवं बहुविकल्पीय (MCQs)।

  • अंक योजना: प्रत्येक प्रश्न 1 अंक का होगा।

  • निगेटिव मार्किंग: प्रत्येक गलत उत्तर के लिए 25% (1/4) अंक की कटौती की जाएगी।

  • शॉर्टलिस्टिंग: मुख्य परीक्षा के लिए अभ्यर्थियों की शॉर्टलिस्टिंग उनके PET 2025 स्कोर के आधार पर की जाएगी।

  • चयन का आधार: चयन केवल लिखित परीक्षा के अंकों पर आधारित होगा ।

भाग

विषय

प्रश्नों की संख्या

कुल अंक

समयावधि

भाग-1

i. फसल विज्ञान

25

25

120 मिनट (दो घण्टा)

ii. जैव तकनीकी, पादप प्रजनन व क्रॉप-फिजियोलॉजी

10

10

iii. मृदा एवं जल प्रबन्धन

15

15

iv. कृषि प्रसार

05

05

v. कृषि अर्थशास्त्र एवं योजनाएं

05

05

vi. पशुपालन एवं दुग्ध विज्ञान

05

05

भाग-2

कम्प्यूटर एवं सूचना प्रौद्योगिकी

15

15

भाग-3

उत्तर प्रदेश राज्य से संबंधित सामान्य जानकारी

20

20

योग

100

100


UPSSSC Pravidhik Sahayak Official Syllabus in Hindi

Here you can check UPSSSC Pravidhik Sahayak (Technical Assistant) Group-C Exam 2026 Syllabus in Hindi.

भाग-1: कृषि (65 अंक)

1- फसल विज्ञान
फसलों का वर्गीकरण, प्रदेश में उगाई जाने वाली प्रमुख खाद्यान्न, दलहनी, तिलहनी, मिलेट्स, रेशेदार, नकदी फसलें, मसालें एवं चारावाली फसलें, फल, फूल एवं सब्जी तथा प्रमुख फसलों की खेती की उत्पादन तकनीक एवं शस्य क्रियाएं।
 फसल कटाई उपरान्त उपज प्रबन्धन।
फल एवं सब्जी का संरक्षण व प्रोसेसिंग।
फसल चक्र के सिद्धान्त, फसल प्रणाली एवं खेती के प्रकार यथा-शुष्क कृषि, एकीकृत फसल प्रणाली, बहु फसली, अन्तः फसली, प्राकृतिक खेती।
जैविक खेती का महत्व एवं प्रकार, सामाजिक एवं आर्थिक उपयोग।
बीज का महत्व, प्रकार एवं उत्पादन।
वीज शोधन की विधियों एवं महत्व।
कृषि रक्षा के सामान्य सिद्धान्त, उद्देश्य एवं इसका महत्व एवं उनमें प्रयोग होने वाले मुख्य उपकरण व रसायनों का नाम, एकीकृत नाशीजीव प्रबन्धन।
प्रमुख फसलों के कीट एवं रोग तथा उसका प्रबन्धन।
उपज भण्डारण की विधियाँ, सिद्धान्त तथा भण्डारण व उपज की गुणवत्ता को प्रभावित करने वाले कारक तथा उनका प्रबन्धन।
2- जैव तकनीकी, पादप प्रजनन व क्रॉप-फिजियोलॉजी
जैव विज्ञान का कृषि में महत्व एवं उपयोग।
अनुवांशिकी एवं पादप प्रजनन के सिद्धान्त, उपयोग एवं महत्व।
प्रकाश संश्लेषण, श्वसन, वाष्पोत्सर्जन, पौधों की एनाटॉमी एवं मेटाबॉलिज्म।
3- मृदा एवं जल प्रबन्धन
मृदा के गुण, इसके अवयव, मृदा बनने की प्रक्रिया, मृदा अपरदन के प्रकार एवं इसकी रोकथाम के प्रभावी उपाय।
मृदा में पाये जाने वाले आवश्यक पोषक तत्व, महत्त्व तथा कमी से होने वाले विकार।
उर्वरकों का वर्गीकरण एवं पोषक तत्वों की मात्रा तथा उपयोग की विधियाँ।
एकीकृत पोषक तत्व प्रबन्धन, जैव उर्वरक जैविक खादों के प्रकार, महत्व एवं लाभ।
मृदा सूक्ष्म जीव विज्ञान तथा इनकी प्रमुख भूमिका।
मृदा सर्वेक्षण, मृदा नमूना लेने की विधि तथा मृदा संरक्षण तकनीक।
सिंचाई के साधन, विधियाँ तथा उनके लाभ।
जल निकास (ड्रेनेज) की मूल अवधारण एवं विधियां।
जल संचयन क्षेत्र प्रबन्धन (वाटरशेड मैनेजमेंट)।
प्रदूषण के प्रकार एवं पर्यावरण संरक्षण।
4- कृषि प्रसार
कृषि प्रसार एवं ग्रामीण विकास के सिद्धान्त।
प्रसार विधि-दृश्य एवं श्रृव्य साधन, उनका वर्गीकरण, महत्व।
प्रशिक्षण-लक्ष्य, महत्व एवं प्रकार।
भारत सरकार व प्रदेश सरकार द्वारा चलाई गयी विभिन्न ग्रामीण विकास एवं किसानों के उत्थान के लिए योजनाएं।
5- कृषि अर्थशास्त्र एवं योजनाएं
वन ट्रिलियन इकोनॉमी हेतु उ०प्र० का कृषि कार्यो के माध्यम से योगदान।
कृषि सम्बन्धी आर्थिक सुधार।
कृषि जिन्सों के आयात एवं निर्यात की अवधारणा।
कृषि की योजना निर्धारण।
कृषि सांख्यिकी के सिद्धान्त।
कृषि अर्थशास्त्र का सिद्धान्त एवं उपयोगिता।
फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य।
कषि विपणन।
6- पशुपालन एवं दुग्ध विज्ञान
पशुपालन में काम आने वाली पशुओं की विभिन्न किस्में, पोषक प्रबन्धन।
पशु प्रजनन उद्देश्य एवं विधियाँ।
दुग्ध उत्पादन एवं वितरण।
कुक्कुट पालन एवं मत्स्य पालन, मधुमक्खी पालन, रेशमकीट पालन।
पशुओं की प्रमुख बीमार, लक्षण, निदान एवं उपचार।

भाग-2: कम्प्यूटर एवं सूचना प्रौद्योगिकी (15 अंक)

कम्प्यूटर, सूचना तकनीकी, इन्टरनेट एवं वर्ल्ड वाइड वेब (WWW) का इतिहास, परिचय एवं अनुप्रयोग।
हार्डवेयर एवं साफ्टवेयर।
इनपुट एवं आउटपुट।
इन्टरनेट प्रोटोकॉल/आई ० पी० एड्रेस।
आई ० टी० गैजेट एवं उनका अनुप्रयोग।
ई-मेल आई ० डी० को बनाना एवं ई-मेल का प्रयोग/संचालन।
प्रिंटर, टेवलेट एवं मोवाइल का संचालन।
वर्ड प्रोसेसिंग (MS-word) एवं ऐक्सेल प्रोसेसिंग (MS-Excel) के महत्वपूर्ण तत्व।
ऑपरेटिंग सिस्टम, सोशल नेटवर्किंग, ई-गवर्नेस।
डिजिटल वित्तीय उपकरण और अनुप्रयोग।
भविष्य के कौशल और साइबर सुरक्षा।
आर्टिफिशियल इंटेलिजेन्स, विग डेटा प्रोसेसिंग, डीप लर्निंग, मशीन लर्निंग, इन्टरनेट ऑफ थिंग्स तथा इस क्षेत्र में भारत की उपलब्धियाँ।

भाग-3: उत्तर प्रदेश राज्य से संबंधित सामान्य जानकारी (20 अंक)

उत्तर प्रदेश का इतिहास, संस्कृति, कला, वास्तुकला, त्योहार, लोक नृत्य, साहित्य, क्षेत्रीय भाषायें, विरारात, राागाजिक रीति-रिवाज और पर्यटन, भौगोलिक परिदृश्य एवं पर्यावरण, प्राकृतिक संसाधन, जलवायु, मिट्टी, वन, वन्यजीव, खान और खनिज, अर्थव्यवस्था, कृषि, उद्योग, व्यवसाय और रोजगार, राजव्यवस्था एवं प्रशासन तथा समसामयिक घटनाओं एवं विभिन्न क्षेत्रों में उत्तर प्रदेश राज्य की उपलब्धियाँ आदि।

नोटिफिकेशन से महत्वपूर्ण बिंदु 

1. EWS सर्टिफिकेट तिथि: EWS श्रेणी के अभ्यर्थियों का प्रमाण पत्र 1 अप्रैल 2026 से 11 जून 2026 के बीच जारी होना चाहिए।

2. लचीली पात्रता: कृषि स्नातक के अलावा, गृह विज्ञान/सामुदायिक विज्ञान में 4 वर्षीय डिग्री धारक (कृषि विश्वविद्यालय से) भी पात्र हैं।

3. शॉर्टलिस्टिंग नियम: मुख्य परीक्षा के लिए रिक्तियों के सापेक्ष श्रेणीवार 15 गुना अभ्यर्थियों को PET 2025 स्कोर के आधार पर बुलाया जाएगा।

4. ऋणात्मक अंकन (Negative Marking): प्रत्येक गलत उत्तर के लिए 25 प्रतिशत (1/4) अंक काटे जाएंगे।

5. समयावधि: कुल 100 प्रश्नों के लिए 120 मिनट (2 घण्टा) का समय निर्धारित है।